English version के लिए कृपया यहाँ जाएँ: T1-18: Taxable and Tax-deferred Investments
जब भी हम कहीं पैसा इन्वेस्ट करते हैं, तो उस पर मिलने वाले रिटर्न पर टैक्स कब और कैसे लगता है, यह समझना बहुत ज़रूरी होता है। भारत में अलग-अलग तरह के इन्वेस्टमेंट्स पर टैक्स का नियम अलग-अलग होता है। मुख्य रूप से इन्हें तीन आसान तरीकों से समझा जा सकता है — टैक्सेबल (taxable या जिन पर टैक्स लगता है), टैक्स-डेफ़र्ड (tax-deferred या टैक्स बाद में लगना), और टैक्स-फ्री (tax-free या टैक्स मुक्त) इन्वेस्टमेंट्स।
टैक्सेबल इन्वेस्टमेंट्स (Taxable Investments)
ये वे इन्वेस्टमेंट्स होते हैं जिनमें मिलने वाले रिटर्न पर हर साल टैक्स चुकाना पड़ता है। जैसे कि बैंक एफडी (fixed deposit या फिक्स्ड डिपॉजिट) और सेविंग्स अकाउंट (savings account या बचत खाते) पर मिलने वाला इंटेरेस्ट (interest या ब्याज)। इसी तरह, शेयरों से मिलने वाले डिविडेंड (dividend या लाभांश) और उन्हें बेचने पर होने वाले प्रॉफ़िट (profit या मुनाफ़े) पर भी टैक्स लगता है।
टैक्स-डेफ़र्ड इन्वेस्टमेंट्स (Tax-Deferred Investments)
ये वे इन्वेस्टमेंट्स हैं जिनमें आपको अपने प्रॉफ़िट (profit या मुनाफ़े) पर टैक्स तब भरना पड़ता है जब आप पैसा विथड्रॉ करते (withdraw या निकालते) हैं। जैसे कि ग्रोथ म्यूचूअल फंड (growth mutual funds) या एनपीएस (NPS या नेशनल पेंशन सिस्टम)। जब तक आपका पैसा इनमें इन्वेस्टेड रहता है, वह बिना टैक्स कटे हर साल बढ़ता रहता है।
टैक्स-फ्री इन्वेस्टमेंट्स (Tax-Free Investments)
ये वे इन्वेस्टमेंट्स हैं जिन पर मिलने वाले रिटर्न और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम पर कोई टैक्स नहीं लगता। पीपीएफ (PPF या पब्लिक प्रॉविडेंट फंड), ईपीएफ (EPF या एम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) इसके जाने-माने उदाहरण हैं।
समरी (Summary)
हर इन्वेस्टमेंट के टैक्स नियमों को समझें और तय करें कि आपकी ज़रूरतों के हिसाब से कौन से ऑप्शंस (options या विकल्प) आपके लिए प्रॉपर (proper या उचित) हैं।
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