T1-22: इकोनॉमिक सेक्टर्स और इंडस्ट्रीज़ (Economic Sectors & Industries)


English version के लिए कृपया यहाँ जाएँ: T1-22: Economic Sectors and Industries – An Overview

एक इन्वेस्टर के लिए यह जानना ज़रूरी है कि उसका पैसा किन सेक्टर्स और इंडस्ट्रीज़ में लग रहा है। अपने पैसों को अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ और सेक्टर्स में, और साइक्लिकल व नॉन-साइक्लिकल बिज़नेस के बीच बाँटकर डाइवर्सिफिकेशन (diversification) करने से इन्वेस्टमेंट्स का रिस्क कम होता है और पोर्टफ़ोलियो में ग्रोथ और डिविडेंड्स के ज़रिए कमाई का बैलेंस बना रहता है।

सेक्टर और इंडस्ट्री (Sectors and Industries)

बिज़नेस और इकनॉमिक एक्टिविटीज़ की दुनिया में इंडस्ट्री (industry) और सेक्टर (sector) दोनों का मतलब अलग होता है। इंडस्ट्री किसी एक खास तरह के बिज़नेस या काम से जुड़ी होती है। दूसरी तरफ, सेक्टर मिलती-जुलती कई इंडस्ट्रीज़ का एक ग्रुप होता है, जिनकी बुनियादी खासियतें एक जैसी होती हैं।

उदाहरण – ऑटोमोबाइल और एनर्जी (Automobile and Energy)

उदाहरण के लिए, कारों और बाइकों को बनाने वाली कंपनियाँ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (automobile industry) का हिस्सा होती हैं। वहीं दूसरी तरफ, एनर्जी सेक्टर (energy sector) एक ऐसा ग्रुप है जिसके अंदर कोयला (coal), ऑयल और गैस (oil and gas), विंड (wind) और सोलर (solar) जैसी अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ आती हैं, जो ऐसी एनर्जी या उससे जुड़े प्रॉडक्ट्स बनाती हैं जिनका इस्तेमाल इकनॉमी के बाकी सेक्टर्स करते हैं।

इकनॉमी के 11 सेक्टर्स

आमतौर पर किसी देश की इकनॉमी को इन 11 सेक्टर्स में बांटा जाता है। नीचे हर सेक्टर के साथ यह भी बताया गया है कि वह साइक्लिकल (cyclical) या नॉन-साइक्लिकल (non-cyclical) माना जाता है।

  • कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी (Consumer Discretionary या गैर-आवश्यक उपभोक्ता वस्तुएं): इसमें ऐसे प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज़ आते हैं जिन्हें खरीदना या न खरीदना कंज्यूमर की आमदनी और उसके पास मौजूद अतिरिक्त खर्च (discretionary spending) के पैसे पर निर्भर करता है। इसलिए इसमें ट्रैवल और टूरिज़्म, फ़ैशन, कॉस्मेटिक्स, ऑटोमोबाइल और मनोरंजन (जैसे ओटीटी, सिनेमा) जैसी इंडस्ट्रीज़ आती हैं। इस सेक्टर को साइक्लिकल (cyclical) माना जाता है।

  • कंज्यूमर स्टेपल्स (Consumer Staples या अनिवार्य उपभोक्ता वस्तुएं): इसमें ऐसे प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज़ आते हैं जिन्हें खरीदना कंज्यूमर के लिए ज़रूरी होता है, चाहे इकनॉमी के हालात कैसे भी हों या उसकी जेब में पैसे कम हों या ज़्यादा। इसमें खाने-पीने का सामान, घर की साफ़-सफ़ाई के प्रॉडक्ट्स और रोज़मर्रा के पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स जैसी इंडस्ट्रीज़ आती हैं। इस सेक्टर को नॉन-साइक्लिकल (non-cyclical) माना जाता है।

  • एनर्जी (Energy या ऊर्जा): इसमें एनर्जी से जुड़ी तमाम इंडस्ट्रीज़ आती हैं, जैसा कि ऊपर उदाहरण में बताया गया है। इस सेक्टर को साइक्लिकल (cyclical) माना जाता है।

  • फ़ाइनेंशियल्स (Financials या वित्तीय सेवाएं): इसमें बैंकिंग और दूसरी ऐसी फ़ाइनेंशियल इंडस्ट्रीज़ शामिल हैं जो मुख्य रूप से पैसे से जुड़े काम करती हैं, जैसे कि लोन और फ़ाइनेंस, इंश्योरेंस, शेयर बाज़ार और इन्वेस्टमेंट वगैरह। इस सेक्टर को साइक्लिकल (cyclical) माना जाता है।

  • हेल्थ केयर (Health Care या स्वास्थ्य सेवा): इसमें सेहत और इलाज से जुड़ी कंपनियाँ आती हैं, जैसे कि दवाइयाँ बनाने वाली कंपनियाँ (pharmaceuticals), अस्पताल, मेडिकल मशीनें और जाँच करने वाली लैब्स वगैरह। इस सेक्टर को नॉन-साइक्लिकल (non-cyclical) माना जाता है।

  • इंडस्ट्रियल्स (Industrials या औद्योगिक क्षेत्र): इसमें देश के बुनियादी ढांचे (infrastructure) और भारी काम-काज से जुड़ी कंपनियाँ आती हैं, जैसे कि सड़कें और पुल बनाने वाली कंपनियाँ, बड़ी मशीनें जो दूसरे सामान बनाने के काम आती हैं, सेना के लिए साज़ो-सामान (defense), और माल को ट्रांसपोर्ट करने वाली कंपनियाँ वगैरह। इस सेक्टर को साइक्लिकल (cyclical) माना जाता है।

  • इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Information Technology या आईटी सेक्टर): इसमें कंप्यूटर, सॉफ़्टवेयर और इंटरनेट की दुनिया से जुड़ी कंपनियाँ आती हैं, जैसे कि सॉफ़्टवेयर और मोबाइल ऐप्स बनाने वाली कंपनियाँ, आईटी सर्विसेज़, कंप्यूटर चिप्स (semiconductors) और कंप्यूटर का सामान (hardware) बनाने वाली कंपनियाँ वगैरह। इस सेक्टर को साइक्लिकल (cyclical) माना जाता है।

  • मटेरियल्स (Materials या कच्चा माल क्षेत्र): इसमें दूसरी इंडस्ट्रीज़ के लिए बुनियादी कच्चा माल (raw materials) बनाने और निकालने वाली कंपनियाँ आती हैं, जैसे कि स्टील व एल्युमिनियम जैसी धातुएँ (metals), सीमेंट, खेती व फ़ैक्ट्रियों के काम आने वाले केमिकल्स, और ज़मीन से खनिज निकालने वाली माइनिंग (mining) कंपनियाँ वगैरह। इस सेक्टर को साइक्लिकल (cyclical) माना जाता है।

  • रियल एस्टेट (Real Estate या ज़मीन-जायदाद क्षेत्र): इसमें ज़मीन, मकान, दुकानें और ऑफिस से जुड़ी कंपनियाँ आती हैं, जैसे कि घर, मॉल और ऑफिस बनाने वाले बिल्डर्स (developers), किराए पर प्रॉपर्टी देने वाली कंपनियाँ, और रीट्स (REITs – Real Estate Investment Trusts) वगैरह। इस सेक्टर को साइक्लिकल (cyclical) माना जाता है।

  • कम्यूनिकेशन सर्विसेज़ (Communication Services या टेलीकॉम और मनोरंजन सेवाएँ): इसमें फ़ोन (voice), इंटरनेट और मनोरंजन पहुँचाने वाली कंपनियाँ आती हैं, जैसे कि मोबाइल और ब्रॉडबैंड नेटवर्क (Airtel, Jio वगैरह), टीवी चैनल, ओटीटी (OTT) ऐप्स, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स। इस सेक्टर को आमतौर पर नॉन-साइक्लिकल (non-cyclical) माना जाता है, क्योंकि मोबाइल रिचार्ज और इंटरनेट आज के दौर में रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुके हैं।

  • यूटिलिटीज़ (Utilities या बुनियादी जन-सुविधाएँ): इसमें रोज़मर्रा के जीवन के लिए ज़रूरी सेवाएँ पहुँचाने वाली कंपनियाँ आती हैं, जैसे कि घरों और फ़ैक्ट्रियों तक बिजली पहुँचाने वाली कंपनियाँ (electric power), पानी की सप्लाई करने वाली संस्थाएँ, और पाइप से रसोई गैस (city gas) देने वाली कंपनियाँ। इस सेक्टर को नॉन-साइक्लिकल (non-cyclical) माना जाता है, क्योंकि आर्थिक मंदी हो या तेज़ी, लोग बिजली, पानी और गैस का बिल भरना बंद नहीं करते।

समरी (Summary)

इकॉनमी के अलग-अलग सेक्टर्स और इंडस्ट्रीज़ की समझ से इन्वेस्टमेंट्स में डाइवर्सिफ़िकेशन करने में मदद मिलती है, जिससे रिस्क कम हो सकता है। इस तरह का पोर्टफ़ोलियो लंबे समय में ग्रोथ और इनकम दोनों देने में मददगार हो सकता है।

आपके विचार

इस विषय के बारे में आपके अनुभव, सोच या सवाल से हम सभी को सीखने में मदद मिलेगी। अपनी बातें नीचे कमेंट्स में लिखकर ज़रूर बताएं!

Author: Sanjay

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *