T1-07: निवेश में जोखिम (Risk) के प्रकार

English version के लिए कृपया यहाँ जाएँ: Types of Risk

पिछले लेखों में हमने जाना कि निवेश (Investment) क्या है, म्यूचुअल फंड (Mutual Fund या MF) और ईटीएफ (Exchange Traded Fund या ETF) कैसे काम करते हैं, और लोग इनमें निवेश क्यों करते हैं।

लेकिन निवेश की दुनिया में एक शब्द बार-बार सुनाई देता है- जोखिम (Risk)।

बहुत से नए निवेशक जोखिम का अर्थ केवल “पैसा डूब जाना” समझते हैं। वास्तव में जोखिम का अर्थ इससे कहीं व्यापक है।

इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि निवेश करते समय आपको किन-किन प्रकार के जोखिमों का ध्यान रखना चाहिए।

निवेश में जोखिम (Risk) क्या है?

सरल शब्दों में- जोखिम का अर्थ है कि भविष्य में आपके निवेश (Investment) का वास्तविक परिणाम या रिटर्न (Return) आपकी अपेक्षा से अलग हो सकता है। कभी परिणाम आपकी अपेक्षा से बेहतर हो सकते हैं और कभी कम। इसलिए निवेश का उद्देश्य जोखिम से पूरी तरह बचना नहीं, बल्कि उसे समझना और जहाँ संभव हो, उसे कम करना है।

निवेश से जुड़े प्रमुख जोखिम

निवेश से जुड़े अधिकांश जोखिमों को आसानी से समझने के लिए हम उन्हें तीन समूहों में देख सकते हैं।

बाज़ार से जुड़े जोखिम

ये ऐसे जोखिम हैं जिनका प्रभाव एक साथ पूरे शेयर बाज़ार या अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • बाज़ार जोखिम (Market Risk या मार्केट रिस्क)
    कभी-कभी पूरे शेयर बाज़ार में गिरावट आ जाती है, जैसे कोविड-19 (COVID-19) के समय हुआ था। ऐसे समय में अच्छी कंपनियों के शेयर भी कुछ समय के लिए नीचे आ सकते हैं। यह किसी एक कंपनी की गलती नहीं होती, बल्कि पूरे बाज़ार का प्रभाव होता है। इसे बाज़ार जोखिम (Market Risk) कहते हैं।
  • महँगाई जोखिम (Inflation Risk या इन्फ्लैशन रिस्क)
    मान लीजिए आपके निवेश से 6% का रिटर्न मिला, लेकिन उसी समय महँगाई (Inflation या इन्फ्लैशन) 7% रही। ऐसी स्थिति में आपका पैसा बढ़ा तो है, लेकिन उसकी खरीदने की वास्तविक क्षमता (Purchasing Power या पर्चिसिंग पावर) कम हो गई। इसलिए केवल रिटर्न देखना पर्याप्त नहीं है; यह भी देखना ज़रूरी है कि वह महँगाई से अधिक है या नहीं।
  • ब्याज दर जोखिम (Interest Rate Risk या इंटेरेस्ट रेट रिस्क)
    जब RBI या किसी देश का केंद्रीय बैंक (Central Bank या सेंट्रल बैंक), जैसे USA का फेड्रल रिजर्व बैंक (Federal Reserve Bank) जिसे फेड (Fed) भी कहा जाता है, ब्याज दरें बढ़ाता है, तो कुछ निवेशक शेयर बाज़ार के बजाय फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD), बॉन्ड (Bond) या अन्य निश्चित आय (Fixed Income) वाले निवेशों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे कई बार शेयरों की माँग कुछ कम हो जाती है और उनके दामों पर भी असर पड़ सकता है।
जिस कंपनी या सेक्टर में आपने निवेश किया उससे जुड़े जोखिम

ये जोखिम पूरे बाज़ार से नहीं, बल्कि आपके चुने हुए निवेश से जुड़े होते हैं।

  • कंपनी या व्यापार जोखिम (Business Risk या बिज़नेस रिस्क)
    हर कंपनी हमेशा अच्छा प्रदर्शन नहीं करती। किसी कंपनी की बिक्री घट सकती है, मुनाफ़ा कम हो सकता है, नया प्रतिस्पर्धी (Competitor या कम्पेटिटर) आ सकता है, या उसका मैनेजमेंट (Management) गलत निर्णय ले सकता है। ऐसी स्थिति में उस कंपनी के शेयर या उससे जुड़े निवेश प्रभावित हो सकते हैं।
  • उद्योग या सेक्टर जोखिम (Industry or Sector Risk)
    कभी-कभी पूरी एक इंडस्ट्री (Industry) या सेक्टर (Sector) कठिन दौर से गुज़रती है। उदाहरण के लिए – आईटी (IT), रियल एस्टेट (Real Estate), ऑटोमोबाइल्स (Automobiles), बैंकिंग (Banking), इत्यादि। यदि किसी कारण पूरे सेक्टर पर असर पड़ता है, तो उस सेक्टर की कई कंपनियाँ और उनके शेयर एक साथ प्रभावित हो सकते हैं।
  • एकाग्रता जोखिम (Concentration Risk या कान्सन्ट्रैशन रिस्क)
    यदि आपने अपना अधिकांश पैसा केवल एक ही कंपनी, एक ही सेक्टर, या एक ही प्रकार के निवेश में लगा दिया है, तो उस एक निवेश में आने वाली समस्या का असर आपके पूरे निवेश पर पड़ सकता है। इसीलिए अपने सभी पैसे को केवल एक जगह निवेश करना सामान्यतः अधिक जोखिमपूर्ण माना जाता है।
निवेश बेचने या विदेशी निवेश से जुड़े जोखिम

ये जोखिम तब सामने आते हैं जब आपको अपना निवेश बेचना हो या आपने भारत के बाहर निवेश किया हो।

  • नकदी या तरलता जोखिम (Liquidity Risk या लिक्विडिटी रिस्क)
    कुछ निवेशों को बेचकर तुरंत पैसा प्राप्त करना आसान होता है, जबकि कुछ निवेशों को बेचने में समय लग सकता है या उचित दाम नहीं मिल पाता। यदि ज़रूरत के समय निवेश को आसानी से उचित दाम पर बेचना कठिन हो जाए, तो इसे नकदी या तरलता जोखिम (Liquidity Risk या लिक्विडिटी रिस्क) कहते हैं।
  • मुद्रा जोखिम (Currency Risk या करन्सी रिस्क)
    यदि आप विदेशी कंपनियों या अंतरराष्ट्रीय (International) म्यूचुअल फंड (MF) या ईटीएफ (ETF) में निवेश करते हैं, तो रुपये और अन्य विदेशी मुद्राओं (Foreign Currencies) के बीच विनिमय दर (Exchange Rate या एक्सचेंज रेट) में होने वाले बदलाव आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या सभी जोखिम एक जैसे होते हैं?

नहीं।

कुछ जोखिम पूरे वित्तीय तंत्र (Financial System या फाइनैन्शल सिस्टम) या पूरे बाज़ार को प्रभावित कर सकते हैं। इन्हें प्रणालीगत जोखिम (Systemic Risk या सिस्टेमिक रिस्क) भी कहा जाता है।

दूसरी ओर, कुछ जोखिम केवल किसी एक कंपनी, सेक्टर या विशेष निवेश तक सीमित होते हैं। इन्हें गैर-प्रणालीगत जोखिम (Non-Systemic Risk) कहा जाता है।

एक निवेशक के रूप में यह समझना अधिक महत्वपूर्ण है कि कुछ जोखिमों को कम किया जा सकता है, जबकि कुछ जोखिम निवेश की दुनिया का स्वाभाविक हिस्सा होते हैं।

समरी (Summary)

हर निवेश में किसी न किसी प्रकार का जोखिम होता है। अधिक संभावित रिटर्न के साथ सामान्यतः अधिक जोखिम भी जुड़ा होता है। सभी जोखिम एक जैसे नहीं होते। कुछ जोखिम पूरे बाज़ार से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ केवल किसी कंपनी, सेक्टर या निवेश से। अलग-अलग कंपनियों, सेक्टरों और निवेश साधनों में निवेश करके कई प्रकार के जोखिमों को कम किया जा सकता है। जोखिम को समझना और, जहाँ संभव हो, उसे कम करना, उससे डरने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

आगे क्या?

अब जबकि हमने समझ लिया कि निवेश में कौन-कौन से जोखिम हो सकते हैं, अगला स्वाभाविक प्रश्न है — इनमें से किन जोखिमों को कम किया जा सकता है? अगले लेख में हम समझेंगे कि विविधीकरण (Diversification) क्या है और यह निवेश के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक क्यों माना जाता है।

आपके विचार

इस विषय के बारे में आपके अनुभव, सोच या सवाल से हम सभी को सीखने में मदद मिलेगी। अपनी बातें नीचे कमेंट्स में लिखकर ज़रूर बताएं!

Author: Sanjay

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