English version के लिए कृपया यहाँ जाएँ: What is an ETF?
एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्ज (Exchange Traded Funds) या ई टी एफ (ETFs), एक तरह से म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) जैसे ही होते हैं। इनमें भी अलग-अलग निवेशकों (Investors) से पैसा इकट्ठा (Pool) किया जाता है और इन्वेस्टमेंट्स को एक बास्केट (Basket of Investments) में डाला जाता है, जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर्स की तरह ट्रेड होते हैं—म्यूचुअल फंड्स के विपरीत जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं किए जाते हैं।
इसलिए, आप ETFs को स्टॉक एक्सचेंजों पर, जहाँ वे लिस्टेड होते हैं, ठीक वैसे ही खरीद और बेच सकते हैं जैसे किसी कंपनी के स्टॉक्स या शेयर्स को मार्केट ट्रांजैक्शन (Market Transaction) के जरिए खरीदा-बेचा जाता है। इसके अलावा, एक ETF की कीमत बाजार के समय पूरे दिन बदलती (Fluctuate) रहती है। यह उतार-चढ़ाव इस बात पर निर्भर करता है कि उस ETF के बास्केट के अंदर मौजूद संपत्तियों (Underlying Investments – मूल निवेश) की कीमतें कैसे बदल रही हैं, जो बदलाव दिन भर की खबरें, करेंसी (Currency) में बदलाव, ग्लोबल इवेंट्स (वैश्विक घटनाएं) और अन्य कई चीजों से प्रभावित हो सकता है।
इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड की कीमत दिन के अंत में केवल एक बार NAV (Net Asset Value) के रूप में घोषित की जाती है।
कम फीस (Low Cost Investment) का बड़ा फायदा
म्यूचुअल फंड्स के अधिक एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratios) या मैनेजमेंट फीस के विपरीत, ETFs बहुत कम फीस लेते हैं—यह 0.05% या उससे भी कम हो सकती है, जो कि म्यूचुअल फंड द्वारा ली जाने वाली फीस (जो 1% या उससे अधिक हो सकती है) से लगभग 95% कम है। इसलिए, फीस के मामले में ETFs को बहुत कम लागत वाला निवेश माना जाता है।
ETFs के प्रकार (Types of ETFs)
आजकल मार्केट में ETFs मुख्य रूप से दो तरीकों में बांटे जा सकते हैं:
1. मैनेजमेंट स्टाइल के आधार पर (By Management Style)
- इंडेक्स-बेस्ड (Index-based / Passive): ये Nifty 50 जैसे मार्केट इंडेक्स की हूबहू नकल करते हैं। बार-बार बदलाव न होने के कारण इनकी फीस सबसे कम होती है।
- एक्टिवली मैनेज्ड (Actively Managed): इसमें फंड मैनेजर्स अपनी रिसर्च के हिसाब से स्टॉक्स चुनते हैं। बार-बार शेयर्स को खरीदने-बेचने के कारण इनकी फीस ज्यादा होती है।
2. स्ट्रेटेजी या थीम के आधार पर (By Strategy or Theme)
- सेक्टर/इंडस्ट्री ETFs (Sector ETFs): ये किसी एक खास सेक्टर पर फोकस करते हैं। जैसे आजकल भारत में लोकप्रिय डिफेन्स (Defense) ETF केवल रक्षा क्षेत्र की कंपनियों का बास्केट होता है। इसी तरह IT या फार्मा या बैंक ETFs भी होते हैं।
- डिविडेंड ETFs (Dividend ETFs): ये उन कंपनियों के शेयर्स का बास्केट होते हैं जो लगातार अच्छा डिविडेंड (मुनाफा) देती हैं, जिससे निवेशकों को नियमित आय (Regular Income) मिल सके।
इन्डेक्स-बेस्ड ETFs की तुलना में, अपने स्वभाव के कारण बाकी सभी ETFs की फीस ज्यादा होती है।
आने वाली पोस्ट में हम म्यूचुअल फंड्स (MFs) और ETFs के बीच के अंतर को गहराई से समझेंगे और यह जानेंगे कि आजकल लोग म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले ETFs को ज्यादा क्यों पसंद कर रहे हैं। साथ ही, अगर ETFs के बारे में आपके मन में कोई भी सवाल या विचार हों, तो उन्हें नीचे कमेंट्स में लिखकर जरूर बताएं।