T1-11: स्टॉक्स को समझना – एक शुरुआती कदम (Understanding Stocks – A Starting Step)

English version के लिए कृपया यहाँ जाएँ: Evaluating Stocks – A First and Quick Look

मान लीजिए कि आप अमेरिका में Apple (AAPL) या भारत में Larsen & Toubro (LT) में इनवेस्टमेंट करने में इंटरेस्ट (Interest या दिलचस्पी) रखते हैं। इन स्टॉक्स को समझने के लिए हम सबसे पहले इनसे जुड़ी कुछ फाइनेंशियल (Financial या वित्तीय) इन्फॉर्मेशन (Information या जानकारी) पर नज़र डालेंगे।

किसी अमेरिकी कंपनी की फाइनेंशियल इन्फॉर्मेशन देखने के लिए आप Yahoo Finance पर जा सकते हैं और किसी भारतीय कंपनी के लिए Moneycontrol.com या Screener.in पर जा सकते हैं। आप कंपनी को सर्च (Search या खोज) करके उसकी फाइनेंशियल जानकारी देख सकते हैं, जैसा कि नीचे Apple और L&T के लिए दिखाया गया है।

आपको कंपनी की नीचे दी गई फाइनेंशियल जानकारी दिखाई जाएगी, साथ ही मौजूदा स्टॉक की कीमत या अगर आप यह सर्च तब कर रहे हैं जब मार्केट बंद है, तो आखिरी क्लोजिंग (Closing या बंद होते समय) प्राइस दिखाई जाएगी।

Apple – Yahoo Finance

L&T – Moneycontrol

आइए, दिखाए गए कुछ नंबरों को समझना शुरू करते हैं।

मार्केट कैप (Market Cap)

यह कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) या कंपनी की कुल वैल्यू होती है। मार्केट कैपिटलाइजेशन का सीधा मतलब है कि कंपनी के कुल शेयर कितने हैं और हर शेयर की प्राइस क्या है। कुल शेयरों की संख्या और शेयर की प्राइस में उतार-चढ़ाव के आधार पर मार्केट कैपिटलाइजेशन भी बदलता रहता है।

मार्केट कैप (मार्केट कैपिटलाइजेशन का संक्षिप्त रूप) से पता चलता है कि कंपनी बड़ी (लार्ज या Large कैप), मीडियम (Medium) कैप या छोटी (Small या स्मॉल) कैप है। लार्ज कैप कंपनियों को ज़्यादा स्थिर और कम उतार-चढ़ाव वाली माना जाता है, जबकि स्मॉल कैप कंपनियों को कम स्थिर और ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाली माना जाता है।

पीई रेशियो (PE Ratio)

प्राइस-टू-अर्निंग्स (Price-to-Earnings) रेशियो = शेयर की प्राइस / प्रति शेयर सालाना कमाई या इनकम (Income, जिसे EPS या ईपीएस भी कहते हैं)। पीई रेशियो का इस्तेमाल यह देखने के लिए किया जाता है कि कंपनी के शेयर की कीमत अपनी इंडस्ट्री (Industry या सेक्टर) और मार्केट के मुकाबले सस्ती है या महंगी। पीई रेशियो के बारे में और जानने के लिए यहाँ पढ़ें

ईपीएस (EPS)

अर्निंग्स पर शेयर (Earnings Per Share – EPS) किसी कंपनी की प्रति शेयर सालाना इनकम (Income या कमाई) को शो (Show) करता है यानी दर्शाता है। TTM का मतलब है ‘ट्रेलिंग ट्वेलव मंथ्स’ (Trailing Twelve Months या पिछले 12 महीने)।

डिविडेंड (Dividend) और डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield)

डिविडेंड वह रकम है जो कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स (Shareholders या शेयरों के मालिकों) को देती है। डिविडेंड यील्ड का मतलब है मौजूदा कीमत के प्रतिशत के तौर पर मिलने वाला डिविडेंड। आइए L&T का उदाहरण लेते हैं:

  • L&T शेयर प्राइस = Rs. 3775.00
  • L&T डिविडेंड (TTM) = Rs. 38.00
  • L&T डिविडेंड यील्ड = (Rs.38/Rs.3775)×100 = 1.01%

जो कंपनी रेगुलर (Regular या नियमित) डिविडेंड देती है, उसे एक स्टेबल (Stable या स्थिर/स्थायी) कंपनी माना जाता है; खासकर तब, जब कंपनी के साथ-साथ डिविडेंड भी समय के साथ बढ़ता रहता है।

एक्स-डिविडेंड (Ex-dividend) डेट (Date या तारीख)

एक्स-डिविडेंड डेट वह तारीख होती है जिसके बाद शेयर खरीदने पर वह डिविडेंड नहीं मिलेगा जो कंपनी ने इस पीरियड (Period या अवधि), जो मासिक, तिमाही, सालाना आदि हो सकता है, के लिए अनाउंस (Announce या घोषित) किया है।

इसलिए, अगर आप इस पीरियड का डिविडेंड पाना चाहते हैं, तो आपको रिकॉर्ड डेट (Record Date) से पहले शेयरहोल्डर (Shareholder या शेयरों का मालिक) होना होगा। रिकॉर्ड डेट वह तारीख है जिस दिन कंपनी के रिकॉर्ड या लिस्ट (Record या List) में शेयरहोल्डर के तौर पर दर्ज लोगों को ही इस पीरियड के लिए अनाउंस किया गया डिविडेंड मिलेगा।

समरी (Summary)

ऊपर दी गई जानकारी से आपको उस कंपनी के बारे में और जानने में मदद मिलती है, जिसमें आप इनवेस्टमेंट करने का विचार कर रहे हैं।

मार्केट कैप (Market Cap) से कंपनी की साइज (Size या आकार) का पता चलता है। पीई (PE) रेशियो बताता है कि अपनी इंडस्ट्री या सेक्टर की दूसरी कंपनियों और पूरे मार्केट की तुलना में करंट (Current या मौजूदा) प्राइस पर कंपनी कितनी महंगी या सस्ती है। ईपीएस (EPS) बताता है कि उसकी हर शेयर पर इनकम कितनी है, और क्या वह डिविडेंड देती है और शेयर प्राइस के मुकाबले डिविडेंड कितना है।

आपके विचार

इस विषय के बारे में आपके अनुभव, सोच या सवाल से हम सभी को सीखने में मदद मिलेगी। अपनी बातें नीचे कमेंट्स में लिखकर ज़रूर बताएं!

Author: Sanjay

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